
रिपोर्ट____SP त्रिपाठी
आजमगढ़। जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक शुक्रवार को जिलाधिकारी की अनुपस्थिति के कारण निरस्त कर दी गई। बैठक की अध्यक्षता कर रहे आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के सम्मान के खिलाफ बताया। बैठक निरस्त होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष आयोजित दिशा समिति की बैठक में भी जिलाधिकारी अनुपस्थित रहे थे। लगातार दूसरी बार ऐसा होना प्रशासन की कार्यशैली और उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सांसद ने कहा कि दिशा समिति की बैठक एक महत्वपूर्ण वैधानिक मंच है, जहां सांसद की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधि विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हैं और जनता की समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मंच से जिलाधिकारी का लगातार अनुपस्थित रहना जनहित के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। आगे उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार को खुश करने और राजनीतिक दबाव में काम करने की प्रवृत्ति के चलते विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा की जा रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए, लेकिन प्रशासन का रवैया इसके विपरीत नजर आ रहा है। आगे धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जिलाधिकारी की अनुपस्थिति केवल सांसद या अन्य जनप्रतिनिधियों का ही नहीं, बल्कि उन लाखों मतदाताओं का भी अपमान है जिन्होंने अपने प्रतिनिधियों को चुनकर विकास और जनहित के मुद्दे उठाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन सरकार को खुश करने के लिए विपक्षी जनप्रतिनिधियों की अनदेखी करेगा तो इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा कमजोर होगी। उन्होंने शासन से मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई करने तथा भविष्य में दिशा समिति जैसी महत्वपूर्ण बैठकों में अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने की मांग की। सांसद ने कहा कि समाजवादी पार्टी जनता के अधिकारों, विकास कार्यों की निगरानी और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी तथा जनप्रतिनिधियों के सम्मान से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
