
रिपोर्ट______अरुण यादव
आजमगढ़। जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली खबर आ रही है, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। अस्पताल, जिसे हम जिंदगी बचाने का मंदिर कहते हैं, वहीं पर जिंदगी का सौदा करने वाले कुछ सफेदपोश लोग सक्रिय हैं! मामला मंडलीय जिला अस्पताल के ब्लड बैंक का है, जहाँ सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मरीजों की मौत का सामान तैयार किया जा रहा था!
शिकायत मिली है कि यहाँ खून की भारी कालाबाजारी हो रही है। और बात सिर्फ पैसों के अवैध लेन-देन तक ही सीमित नहीं है… आरोप इससे भी कहीं ज्यादा संगीन और घिनौना है! आरोप है कि यहाँ खून को ‘डाइल्यूट’ यानी पानी मिलाकर पतला किया जा रहा था! जी हां, आपने सही सुना… मरीजों की रगों में दौड़ने वाले जीवन रक्षक खून में मिलावट का खेल चल रहा था।
सोचिए, एक लाचार मरीज जो जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है, उसका परिवार पाई-पाई जोड़कर खून का इंतजाम करता है। लेकिन उसे क्या मिल रहा है? मिलावटी और पतला किया हुआ खून! यह सीधा-सीधा हत्या का प्रयास है। इस सनसनीखेज शिकायत के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी रविंद्र कुमार के निर्देश पर आनन-फानन में सीएमओ डॉ. एनआर वर्मा और एसआईसी डॉ. सतीश चंद्र कन्नौजिया ने पूरी टीम के साथ ब्लड बैंक पर धावा बोल दिया।
छापेमारी के दौरान स्टॉक रजिस्टर, ब्लड स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की बारीकी से जांच की गई है। कर्मचारियों से पूछताछ हो रही है, फाइलों को खंगाला जा रहा है। हालांकि, अधिकारी अभी कैमरे पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि होगी और दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि,आखिर किसकी शह पर ब्लड बैंक में यह मौत का खेल इतने दिनों से चल रहा था? क्या चंद रुपयों के लालच में इंसानी जिंदगियों को दांव पर लगाने वाले इन गिद्धों को कानून का कोई खौफ नहीं है? और सबसे बड़ा सवाल—यह इस ब्लड बैंक का पहला विवाद नहीं है, तो फिर पहले हुई शिकायतों पर इतनी ढील क्यों दी गई कि इनके हौसले इतने बुलंद हो गए?प्रशासन भले ही अब सख्त कार्रवाई का दावा कर रहा हो, लेकिन इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की साख पर एक बड़ा धब्बा लगा दिया है। हम इस खबर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जांच में क्या निकलकर आता है और इन दोषियों को क्या सजा मिलती है, यह देखना बाकी है।
